1 win4r betpin up betpinuplucky jet crashparimatchlucky jet casinomosbet indialucky jet xpin up1win casino1 win azmosbet casino1winmostbet aviator login1 win aviatormostbet kz1win casinomostbet kzpin uplucky jet onlinemosbet casino1win aposta1win loginaviatormostbet casino kz4rabet bangladeshmosbet1 win casinoparimatchpin-up kzmosbet kzpin-upmosbetpin up casino onlinelackyjet1win aviator1 winpinupmostbetpinap4rabet bd1 вин авиатор1win kzpinup1win casino4rabetmostbet indiamostbetmostbet kz1win aviator

संगीत के मशहूर वीणा वादक रमन्ना बालाचंद्रन ने जगमगा दी संगीत-सुरों की महफ़िल

देहरादून: विरासत-2026 के शानदार, भव्य, ऊर्जावान और ओजस्वी बन चुके मंच पर संध्या की पहली राजस्थानी लोक नृत्य कालबेलिया की धूम मचा देने वाली शानदार और बेहद मनमोहक प्रस्तुति दी गई, इस प्रस्तुति के जोशीले गीतों ने महफ़िल को आकर्षक एवं भव्य बना दिया I प्रस्तुति में कलाकार गीता, मनीषा और निशा ने पारंपरिक नृत्य के माध्यम से राजस्थान की लोक संस्कृति और कलात्मक परंपरा को खूबसूरती के साथ दर्शाया। प्रस्तुति में ज़ाकिर खान ने हारमोनियम, दूड़े खान ने सारंगी, शौकत खान ने ढोलक, इरफान हुसैन ने खड़ताल, रामनाथ ने डफली और सागर ने मंजीरा पर संगत की। गायन में सलीम खान, फारूक, सोनू खान और ज़ाकिर शामिल रहे I
दून इंटरनेशनल स्कूल के फ्यूज़न बैंड ने विरासत के मंच को बनाया खुशबूदार
बैंड में युवा स्कूली बच्चों की रंगीन संगीतमय प्रस्तुति से महका उठा वातावरण
दून इंटरनेशनल स्कूल के फ्यूज़न बैंड ने शास्त्रीय और अर्ध-शास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां देते हुए विरासत की सांस्कृतिक संध्या-ए-महफिल को अपने जोशीले गीतों एवं अंदाजों से खुशगवार बना दिया I
विद्यार्थियों ने विभिन्न वाद्ययंत्रों और गायन के माध्यम से संगीत की विविधता को प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में प्रणव मंझखोला ने कीबोर्ड और कीज़, श्लोक रौथान और ओजस्वी पैन्यूली ने गायन, कार्तिकेय ने ड्रम्स, पनव जौहरी ने इलेक्ट्रिक गिटार, नंदिनी ने बास गिटार और मनवीर सिंह ने तबले पर संगत की। बैंड की प्रस्तुति ने शास्त्रीय और अर्ध-शास्त्रीय संगीत के मेल को मंच पर प्रस्तुत किया I

रामन्ना बालाचंद्रन की वीणा से जगमगाया विरासत
विरासत महोत्सव के खुशनुमा एवं भव्य 13 वें दिन प्रसिद्ध वीणा वादक रामन्ना बालाचंद्रन ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की वीणा वादन से श्रोताओं का मन मोह लिया और उनकी प्रस्तुति बहुत ही पसंद आई। प्रस्तुति की शुरुआत राग वागधीश्वरी से की गई I प्रस्तुति में मृदंगम पर पटरी सतीश कुमार ने संगत की। दोनों कलाकारों के बीच सुर और ताल का सुंदर सामंजस्य देखने को मिला।
महकते हुए विरासत में बुधवार की संध्या-ए-महफिल जहां शाही मेहमानों के मन-हृदयों में घर कर गई, वहीं शास्त्रीय संगीत के मेहमानों की अद्भुत एवं भव्य तथा शानदार प्रस्तुति से यह महफिल गुलो-गुलजार हो उठी I मशहूर वीणा वादक रमन्ना बालाचंद्रन के संगीत सुरों का जादू तो इस महफ़िल में ख़ूब चला ही, साथ ही लोकप्रिय शास्त्रीय सांस्कृतिक गायक राहुल देशपांडे ने भी मंच पर धूम मचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी I
सांस्कृतिक संध्या में रमन्ना बालाचंद्रन का मनमोहक जादू चला I वे कर्नाटक संगीत परंपरा के प्रसिद्ध वीणा वादक हैं। भारत और विदेशों में एक बेहद लोकप्रिय वादक के रूप में, संगीत के प्रति उनकी प्रतिभा को कम उम्र में ही पहचान मिल गई थी, जब वे शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को समझने में सक्षम थे। उनके माता-पिता दोनों संगीतकार हैं और उनकी माता शरण्या, जो वीणा वादक और कर्नाटक संगीत गायिका रहीं, उनकी पहली गुरु थीं। नौ वर्ष की आयु तक वे न केवल गायन कर रहे थे, बल्कि वीणा पर जटिल धुनें भी बजा रहे थे। उनकी असाधारण प्रतिभा को देखते हुए, उन्हें वीणा वादक बी नागलक्ष्मी के मार्गदर्शन में रखा गया। साथ ही, उन्होंने मृदंगम बजाना भी सीखा।
एक विलक्षण प्रतिभा के धनी माने जाने वाले रमना को सोलह वर्ष की आयु में ऑडिशन देने के बाद ऑल इंडिया रेडियो द्वारा सीधे ए ग्रेड से सम्मानित किया गया। चेन्नई स्थित प्रतिष्ठित और सम्मानित संगीत संस्थान मद्रास संगीत अकादमी ने सोलह वर्ष की आयु में उन्हें अपने वार्षिक संगीत कार्यक्रम श्रृंखला में शामिल होने के लिए आयु संबंधी शर्त को माफ कर दिया।
वे भारत और विदेशों के प्रमुख मंचों पर नियमित रूप से प्रस्तुति देते हैं और ऐसा करने वाले सबसे कम उम्र के वीणा वादक हैं। कई पुरस्कारों से सम्मानित, उन्हें सरस्वती वीणा के राजदूत के रूप में देखा जाता है। कला प्रतिभा मणि, रंगनाथ चक्रवर्ती जैसे प्रतिष्ठित वादकों से सम्मानित वे वर्तमान में अपने पिता बालाचंद्रन से वीणा सीख रहे हैं। संगीत जगत में, जहाँ युवा उस्ताद और बाल प्रतिभाएँ अब आम बात हैं, रमण बालाचंद्रन एक दुर्लभ प्रतिभा हैं। संगीत के एक बहुमुखी प्रतिभा के वे धनी हैं और उन्होंने सबसे कठिन और कम लोकप्रिय वाद्ययंत्र-वीणा उत्कृष्टता प्राप्त करने का विकल्प चुना। रमन्ना के वीणा वादन में एक विशिष्ट अभ्यास झलकता है जो वाद्य यंत्र के गंभीर संगीत को अधिक सहज बनाता है I वे संगीत के बड़े हिस्सों में साथ गाते हैं या पहले गाते हैं और फिर वीणा को अपने स्वरों का अनुसरण करने देते हैं।

“विरासत” में राहुल की ओजस्वी प्रस्तुति से भी झूमे लोग और मंच पर छा गया उनका जादू
“राहुल देशपांडे” के शास्त्रीय गायन से मदहोश हुई विरासत की महफिल…..
विरासत के सुसज्जित,भव्य व मदहोश कर देने वाले मंच पर प्रख्यात शास्त्रीय गायक राहुल देशपांडे ने अपनी अनमोल गायन प्रस्तुति से महफ़िल सजा डाली। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ और शास्त्रीय संगीत की गहराई से श्रोताओं को निरन्तर मंत्रमुग्ध किए रखा । उनके साथ इस प्रस्तुति में तबले पर शुभ महाराज, हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा तथा तानपुरे पर परीक्षित सिंह राठौड़ और सृष्टि कला ने भव्य संगत की।
जबकि मशहूर गायक राहुल देशपांडे पटियाला घराना के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक स्वर्गीय पंडित वसंतराव देशपांडे के पोते हैं। वे पंडित कुमार गंधर्व के संगीत से प्रभावित थे और उन्होंने अपनी गायकी को उसी के अनुरूप विकसित किया।उनके गुरु उषाताई चिपलकट्टी और पंडित कुमार गंधर्व के पुत्र मुकुल शिवपुत्र ने प्रारंभिक वर्षों में उनकी गायकी को निखारा। उन्होंने पंडित गंगाधरभुवा पिंपलखारे और डॉ. मधुसूदन पटवर्धन के मार्गदर्शन में संगीत की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने पंडित सुरेश सामंत से तबला वादन भी सीखा। वे कुमारजी की निर्गुणी खोज की विरासत को पारंपरिक रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। राहुल के गायन में शास्त्रीय रागों से लेकर ख्याल, ठुमरी, दादरा, नाट्यगीत, भजन, ग़ज़ल और भावगीत शामिल हैं। उनका मानना है कि किसी एक घराना प्रणाली से बंधे रहने से कलाकार का विकास और चिंतन सीमित हो जाता है। विभिन्न घरानों में कई उत्कृष्ट गायन शैलियाँ हैं, जिन्हें गायन में शामिल करके इसे और समृद्ध बनाया जा सकता है। नाटक “कट्यार कलजात घुसली” में राहुल के प्रदर्शन की बहुत सराहना हुई है। वे “सा रे गा मा पा, लिटिल चैंप्स” सहित कई टीवी रियलिटी शो में जज भी रह चुके हैं।
राहुल देशपांडे ने युवा पीढ़ी को शिक्षित करने और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रही इस लुप्त कला के प्रति रुचि और लगाव पैदा करने के एकमात्र उद्देश्य से मराठी संगीत की समृद्ध परंपरा को पुनर्जीवित किया है। यह तब देखा गया जब उन्होंने अकेले ही “कट्यार कलजात घुसली”, “संगीत मान अपमान” और “संशय कल्लोल” जैसे प्रतिष्ठित मराठी नाटकों का निर्माण किया और महाराष्ट्र भर में लगभग 450 शो किए। बाद में “कट्यार कलजात घुसली” पर फिल्म बनी और इसके गीतों ने युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत की सराहना करने के लिए प्रेरित किया। राहुल देशपांडे ने “स्वराउन्मेश” की शुरुआत की, जो उभरते और युवा कलाकारों की प्रतिभा को निखारने के लिए समर्पित एक मंच है I देशपांडे ने एक बायोपिक-मी वसंतराव में मुख्य अभिनेता के रूप में अभिनय किया है और फिल्म के लिए संपूर्ण संगीत भी तैयार किया है। यह फिल्म उनके दादा–पंडित वसंतराव देशपांडे को समर्पित है। उपलब्धियां और सम्मान में उनको राष्ट्रीय पुरस्कार ‘ऑल सॉन्ग्स ऑफ मी वसंतराव’,रसिकाग्रानी दत्तोपंत देशपांडे पुरस्कार, जो उन्हें सवाई गंधर्व संगीत समारोह में प्रदान किया गया। सुधीर फड़के पुरस्कार भी मिल चुका है I यही नहीं, उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियां दी हैं और अपने शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय प्रदर्शनों की कई ऑडियो कैसेट जारी की हैं। वे नियमित रूप से ई-टीवी, अल्फा टीवी और दूरदर्शन जैसे भारतीय चैनलों पर प्रसारित होने वाले टीवी कार्यक्रमों जैसे ‘सूर ताल’ और ‘नक्षत्रंचे देने’, और ज़ी मराठी पर प्रसारित होने वाले संगीतमय शो ‘आइडिया सारेगामापा लिटिल चैंप्स-2’ में दिखाई देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *