क्या आपने कभी ऐसे माउथवॉश के बारे में सुना है, जो हमारी रसोई में मिलने वाले किसी आम इंग्रीडिएंट से बना हो? वह जादुई इंग्रीडिएंट है लहसुन।
सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा कि लहसुन से माउथवॉश कैसे बन सकता है। लेकिन आज के समय में लोग जागरूक हो रहे हैं। बाजार में मिलने वाले केमिकल और अल्कोहल बेस्ड माउथवॉश के साइड इफेक्ट्स अब किसी से छिपे नहीं हैं। यही वजह है कि अब ऑर्गेनिक और नेचुरल चीजों से बने केमिकल-फ्री माउथवॉश की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ‘लेमन और गार्लिक’ से बने नेचुरल माउथवॉश मिल रहे हैं। ये पूरी तरह केमिकल-फ्री होते हैं।
दिसंबर, 2025 में ‘जर्नल ऑफ हर्बल मेडिसिन’ में पब्लिश एक रिव्यू रिपोर्ट के मुताबिक, लहसुन में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। इसे माउथवॉश के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
तो चलिए, आज ‘जरूरत की खबर’ में हम गार्लिक माउथवॉश के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- गार्लिक माउथवॉश ओरल हेल्थ के लिए कैसे फायदेमंद है?
- इसे घर पर कैसे बनाया जा सकता है?
एक्सपर्ट: डॉ. निशांत गुप्ता, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- मार्केट में मिलने वाले माउथवॉश में ऐसे कौन से केमिकल होते हैं, जो थोड़े रिस्की हो सकते हैं?
जवाब- ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. निशांत गुप्ता बताते हैं कि एल्कोहल बेस्ड माउथवॉश हमारी ओरल हेल्थ को कुछ हद तक नुकसान पहुंचा सकते हैं। जैसेकि-
अल्कोहल
अधिकांश माउथवॉश में हाई एल्कोहल होता है। यह मुंह को ड्राई करता है, जिससे बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। लंबे समय तक इसका इस्तेमाल ओरल हेल्थ के लिए अच्छा नहीं होता है।
क्लोरहेक्सिडिन
यह पावरफुल केमिकल एंटीसेप्टिक और डिसइन्फेक्टेंट है। लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से दांतों पर दाग हो सकते हैं। स्वाद बदल सकता है। ज्यादा इस्तेमाल से यह मुंह के अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देता है।
ट्राइक्लोसन
यह एक एंटी-बैक्टीरियल एजेंट है, जिसे कई देशों में बैन किया जा चुका है। यह शरीर के हाॅर्मोनल बैलेंस को बिगाड़ सकता है। हालांकि अभी इसके प्रभाव पर रिसर्च जारी है।
सिंथेटिक कलर्स और फ्लेवर्स
इन्हें सिर्फ दिखने और स्वाद के लिए डाला जाता है। लेकिन इनसे एलर्जी और सेंसिटिविटी हो सकती है। यही कारण है कि लोग अब इन केमिकल्स से बचकर लहसुन और नींबू जैसे प्राकृतिक विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
