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जगन्नाथ जी की रथ यात्रा शुरू, जानिए इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें

जगन्नाथ पुरी रथयात्रा होती है खास

आज रथयात्रा है, हिन्दू धर्म में जगन्नाथ रथ यात्रा का खास महत्व है, तो आइए हम आपको रथयात्रा के महत्व एवं उसके विषय में कुछ रोचक बातें बताते हैं।

विशेष मानी जाती है जगन्नाथ रथयात्रा

रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। मान्यतानुसार रथयात्रा निकालकर भगवान जगन्नाथ को गुंडिचा माता के मंदिर पहुंचाया जाता है। यहां सात दिनों तक भगवान विश्नाम करते हैं उसके बाद उनकी वापसी होती है।

जगन्नाथ पुरी के बारे में रोचक जानकारी 

जगन्नाथ मंदिर उड़ीसा राज्य के पुरी शहर में स्थित वैष्णव सम्प्रदाय का प्रमुख स्थल है। इस मंदिर को हिन्दूओं के चारों धाम में से एक माना जाता है। यह मंदिर वैष्णव परंपराओं तथा संत रामानंद से सम्बन्धित है। इस स्थान को नीलगिरी, नीलांचल और शाकक्षेत्र भी कहा जाता है। पुराणों में कहा गया है कि श्रीकृष्ण ने पुरी में अनेक लीलाएं की थीं और नीलमाधव के रूप में अवतरित हुए थे।

रथ बनता है पवित्र लकड़ियों से 

पुरी का जगन्नाथ मंदिर भारत में ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध है। जगन्नाथ धाम चार धामों में से एक है। पुरी को पुरुषोत्तम पुरी भी कहा जाता है। श्री जगन्नाथ राधा और श्रीकृष्ण की युगल मूर्त का साक्षात रूप हैं। राधा-कृष्ण को मिलाकर उनका स्वरूप बना है तथा श्रीकृष्ण भी उनके अंश हैं। रथयात्रा में सबसे आगे ताल ध्वज होता है जिस पर श्री बलराम होते हैं। साथ ही उसके पीछे पद्म ध्वज होता है जिस पर सुभद्रा और सुदर्शन चक्र होते हैं और सबसे अंत में गरूण ध्वज पर श्री जगन्नाथ जी होते हैं जो सबसे पीछे चलते हैं।

जगन्नाथ पुरी के बारे में प्रसिद्ध हैं चमत्कारिक बातें

हिन्दुओं का पवित्र मंदिर बहुत खास है। साथ ही यहां बहुत सी चमत्कारिक बातें होती हैं। जगन्नाथ मंदिर की एक खास बात यह है कि आप मंदिर के आस-पास कहीं भी हों आपको मंदिर के ऊपर लगा सुदर्शन चक्र हमेशा अपने सामने ही दिखाई देगा। यहां विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा लगती है जहां दुनिया भर से लोग आते हैं।

मंदिर की एक खास बात यह है कि यहां स्वयं भगवान जगन्नाथ विराजते हैं। ऐसा दुनिया भर के किसी मंदिर में नहीं देखा गया है। मंदिर में स्थित रसोईघर दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर है। ऐसा कहीं और देखने को नहीं मिलता है। इसमें 500 रसोइए और 300 सहयोगी काम करते हैं। नीम की लकड़ी से बना इनका विग्रह खास होता है, यह एक खोल मात्र है इसमें स्वयं भगवान श्रीकृष्ण विराजते हैं। जगन्नाथ मंदिर के ऊपर का झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में फहराता है। मंदिर की एक खास बात यह है कि मंदिर के शिखर पर मौजूद झंडा रोज बदला जाता है। ऐसी मान्यता है कि झंडा नहीं बदलने से मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा।

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