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घोटाले का मास्टरमाइंड निकला गोरखपुर का लेखाकार, 5 गिरफ्तार

गोंडा।  गोंडा की पुलिस ने  बड़ा खुलासा करते हुए सरकारी कर्मचारियों की फर्जी आईडी बना कर छह करोड़ रुपये हड़पने वाले पांच शातिरों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक गोरखपुर चकबंदी कार्यालय में तैनात लेखाकार और बस्ती के हरैया में तैनात एक लेखपाल भी शामिल है। इस गिरोह के पास से पुलिस ने करीब दो करोड़ रुपये की बरामदगी भी की है। इसके अलावा लैपटॉप, डेस्कटॉप और मोबाइल भी बरामद किए हैं।
आईजी जोन डॉ. राकेश सिंह व एसपी शैलेश कुमार पाण्डेय ने बताया इस घोटाले में गोरखपुर चकबंदी विभाग के लेखपाल अरुण वर्मा, हरैया बस्ती के लेखपाल राजेश पाठक, नानमून मौर्या, अरुण श्रीवास्तव, प्रदीप दूबे को गिरफ्तार किया गया है। यह हुई बरामदगी : इस मामले में 26 लाख 75 हजार नगद व 4 खातों में एक करोड़ 32 लाख रुपए फ्रीज किए गए हैं। अब तक एक करोड़ 58 लाख 75 हजार रुपए बरामद किए हैं। डेस्कटाप, 2 लैपटाप, 4 मोबाइल फोन, टेबलेट और चकबंदी विभाग के कर्मचारियों की 28 फर्जी आईडी भी बरामद की है।
ऐसे हुआ खुलासा
एसपी के मुताबिक गोपनीय सूचना के आधार पर कराई गई जांच में यह खुलासा हुआ है। सूचना थी कि गोण्डा के नवाबगंज के भारतीय स्टेट बैंक के कुछ खाताधारकों के खातों में संदिग्ध तौर पर धनराशि स्थानांतरित हो रही है। इसमें नवाबगंज के ग्राहक सेवा केन्द्र का संचालक भी शामिल हैं। इसके बाद एसओजी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर इसका पर्दाफाश किया गया।
फर्जी जीपीएफ बिल बनाकर हड़पे करोड़ों
गिरफ्तार आरोपी अरुण वर्मा चकबन्दी विभाग गोरखपुर में एकाउन्टेंट के पद पर तैनात है। उसने अपने साथी कर्मचारी पुनीत श्रीवास्तव के साथ मिलकर फर्जी सरकारी कर्मचारियों के लैपटाप व वेबसाइट के माध्यम से कई आईडी बनाई गई व फर्जी जीपीएफ बिल बनाकर कई वर्षों में करोड़ों रुपए जनपद गोण्डा, गोरखपुर व देवरिया के कई खातों में अपने साथी लेखपाल राजेश पाठक व नानमून मौर्या के माध्यम से स्थानांतरित किए। जिनमें से अब तक 45 खातों को चिन्हित किया जा चुका है। इन खातों में तीन वर्षों में छह करोड़ रुपयों से ज्यादा का स्थानांतरण किया जा चुका है। एसपी ने बताया अरुण वर्मा, राजेश पाठक व गिरोह के अन्य सदस्यों ने दस वर्षों में इस फर्जीवाड़े से कई करोड़ रुपयों की सम्पत्तियां भी जुटाई हैं जिन्हें चिन्हित कर सीज किया जा रहा है।

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