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बिस्तर पर लेटकर करें यह एक काम, दूर होगा पैरों का दर्द

लॉकडाउन के इस समय में हममें से ज्यादातर लोग घर में बैठे रहते हैं। यह बात अलग है कि हमारा बैठने का पोश्चर अलग-अलग हो सकता है। लेकिन अगर अधिक सिटिंग के कारण आपको पैरों के निचले हिस्से में दर्द हो रहा है तो आप 20 मिनट के लिए बिस्तर पर लेटकर ही एक ऐसी क्रिया कर सकते हैं, जिससे आपको बहुत राहत मिलेगी और तुरंत राहत मिलेगी…
आपको यह करना है-
पैरों के दर्द को दूर करने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि आप खुद को मानसिक रूप से शांत करें। इसके बाद बिस्तर कमर के बल शांत होकर लेट जाएं। अपनी सांसों पर ध्यान करें और शरीर में उठने वाले दर्द और तरंगों दोनों का अनुभव करें।
-अब धीरे-धीरे अपने दोंनों पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं। जब आप पैरों को ऊपर की तरफ ले जा रहे हों तो इस दौरान सांस अंदर खींचें। जितनी देर तक इस स्थिति में रह सकते हैं खुद को रोकर रखें। हालांकि अपने शरीर के साथ जबरदस्ती ना करें। यानी खुद को देर तक इस स्थिति में रखने के लिए शरीर पर दबाव ना बनाएं।
-कुछ देर बाद आप सांस छोड़ते हुए अपने पैर एक साथ नीचे लेकर आएं। अगर ऐसा करने में आपको दिक्कत हो रही हो तो आप दीवार का सहारा लेते हुए अपने पैर ऊपर की तरफ रोककर रखें। इस दौरान अपने दोनों हाथ सीधे रखें और हथेली ऊपर यानी आसमान की तरफ खुली रखें।
–शुरुआत में 10 से 20 मिनट के लिए या जितनी भी देर आप ऐसा कर सकें, करें। नहीं तो आप इस प्रक्रिया को 5 मिनट के साथ भी शुरू कर सकते हैं।
-यह है दर्द कम होने की वजह
-दरअसल जब हम लंबे समय तक पैर नीचे की तरफ करके बैठे रहते हैं और चलना-फिरना या दूसरी शारीरिक गतिविधियां नहीं करते हैं तो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में बाधा आती है।
–जब हम पैर ऊपर की तरफ करके लेटते हैं तो हमारे पैर की मसल्स को आराम मिलता है। पैरों में ब्लड का फ्लो रिवर्स गियर में होता है। यानी कुछ देर के लिए पैरों के तलुओं और पिंडलियों यानी काफ (ष्टड्डद्यद्घ) में जमा हुई ऊर्जा का संचार ब्लड के माध्यम से हमारे सिर की दिशा में होता है।
–इससे पैरों में हल्कापन महसूस होता है। नसों की अकडऩ कम होती है और इसी कारण दर्द में राहत मिलती है। यदि नियमित रूप से इस योग क्रिया को किया जाए तो पैरों के दर्द की समस्या से मुक्ति पाई जा सकती है।
-योग की भाषा में इस प्रक्रिया को उत्तानपाद आसन कहते हैं। लेकिन इस आसन को करते समय पैर दीवार के सहारे से ऊपर की तरफ नहीं ऊठाए जाते। जब आपको प्रैक्टिस हो जाए और लगे कि अब आपको यह आसन करने के लिए दीवार के सहारे की आवश्यकता नहीं है तो आप बिना किसी सहारे के इस आसन को करना शुरू कर दें।
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