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सीएम धामी ने किया शीतलाखेत मॉडल से प्रेरित फिल्म् “फॉयर वॉरियरर्स ” का ट्रेलर लॉन्च 

फॉयर वॉरियरर्स फिल्म का उद्देश्य वनाग्नि के प्रति समाज को जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार बनाना है – महेश भट्ट

देहरादून– देहरादून के वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान में जलवायु परिवर्तन पर आयोजित सेमिनार में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शीतलाखेत मॉडल से प्रेरित एवं महेश भट्ट द्वारा निर्देशित फिल्म् “फॉयर वॉरियरर्स ” का ट्रेलर लॉन्च किया।

ये फिल्म सर्मपित है उन गुमनाम योद्धाओं को जो अपनी मॉं वसुंधरा, देवतुल्य वनों, और असंख्य पषु-पक्षियों आदि की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी तक लगा देते हैं।  ये फिल्म एक कोशिश है उन योद्धाओं के संधर्श को जानने की, उनकी कुर्बानी को समझने की। इस फिल्म का उद्देश्य वनाग्नि के प्रति समाज को जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार बनाना ताकि प्रहरी और रक्षक के रूप में वो एक सक्रिय भूमिका निभा सकें।

इस फिल्म का निर्माण स्टार फॉर्चून प्रोडक्शन के तहत  रियलिटी फिल्मस् के द्वारा किया गया है जिसका निर्देशन महेश भट्ट ने किया है, विचार एंव कहानी  टी.आर.बीजू लाल, गीत ऋृतुराज, गायक टी.आर.बीजू लाल, छायांकन मनोज सती, सम्पादन आयुश्मान, प्रोडकशन संजय मैठाणी, । इस फिल्म की अवधि 40 मिनट है एवं इस फिल्म में नैनीताल के कलाकार राजेश आर्य, मनोज शाह, पवन आर्य, देवेन्द्र बिष्ट, शम्भू दत्त साहिल, नीलम वर्मा, हर्षिता कोहली, देवेन्द्र रावत और मुकेश दस्माना ने अभिनय किया है। फ़िल्म में नैनीताल, बरेली, रामनगर के कलाकारों के अलावा, वनविभाग के दो अधिकारियों वन संरक्षक नैनीताल टी आर बीजूलाल और डी एफ ओ सॉइल उत्तरकाशी गंगा बुटलाकोटी ने तकनीकी निर्देशन के अलावा अभिनय करते हुए सशक्त भूमिका भी अदा की। फ़िल्म में मधुर संगीत मन चौहान का है।

कथा सार :

उत्तराखंड का कुमाऊँ क्षेत्र और वहॉं का एक गांव म्याली। गांव के जंगल में वनदेवी की पूजा है। सभी पूजने और ये वचन देने आए हैं कि अब उसकी अनुमति के बिना वो जंगल को काटेंगे नहीं और हर हाल में उसकी रक्षा करेंगे। वनदेवी के मंदिर के पास के ही जंगल में वहॉं वन विभाग की टीम एक दुर्लभ और संरक्षित श्रेणी में आने वाले पक्षी ‘चीर’ और उसके घोंसलों को सालों बाद दुबारा खोज निकालते हैं और उस क्षेत्र को संरक्षित वन क्षेत्र की श्रेणी में रख कर उस प्रजाति के संरक्षण-संवर्द्धन की योजना बनाते हैं।

म्याली गांव का पूर्व प्रधान है उप्पी, जो चोरी-छिपे बांझ के जंगल से लकड़ी काट कर बेचता है हल बनाने के लिए। उसके साथी सदानंद और भूप्पी हैं। उप्पी का जंवाई स्वंयसेवी संगठन में काम करता है और आजकल वन विभाग के साथ मिलकर गांव-गांव जनसहभागिता से वनाग्नि रोकने के बारे में जनजागरूता का काम कर रहा है। वो सफल शीतलाखेत मॉंडल और ओणदिवस के बारे में ग्रामीणों को जागरूक करने का काम कर रहा है। गांव का पुजारी उसे भागीरथ कहकर पुकारता है। उप्पी अपने खेत में आड़ा (खेत का कचरा) जलाता है जिस कारण खेतों की आग जंगल में पहुॅंच जाती है। वन विभाग के अधिकारियों को जंगल की आग का पता चलता है वो अपनी टीम के साथ आग बुझाने निकल पड़ते हैं। गांव वाले और वन विभाग मिलकर आग बुझाने लग जाते हैं। अचानक अधिकारी विजय को ध्यान आता है कि ये आग संरक्षित पक्षी ‘चीर’ और उसके घोंसले वाले इलाके को भी जला सकती है। वो अपनी टीम लेकर उस तरफ जाता है। उप्पी की बेटी उर्मिला प्रसव पीड़ा से छटपटा रही है। वो पालकी में उसे लेकर सड़क तक तो आ जाते हैं पर रात का समय होने के कारण गाड़ी नहीं मिल पाती। उप्पी और दामाद लक्ष्मण बहुत परेशान हैं। इतने में विजय उस इलाके से गुजरता है। उप्पी गिड़गिड़ाते हुए विजय से अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी मांगता है। अपनी गाड़ी उप्पी को देकर विजय अपनी टीम के साथ पैदल ही आग बुझाने निकल पड़ता है । आग बहुत बढ़ जाती है जिसमें विजय की टीम के कुछ लोग झुलस जाते हैं। अंत में गांववाले और वन विभाग की टीम मिलकर वनदेवी के जंगल और ‘चीर’ पक्षी के इलाके को बचाने में सफल हो जाती है। आग बुझाने में झुलसे लोगों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया जाता है। इन घायलों में उप्पी का दामाद लक्ष्मण भी है। उपचार के दौरान लक्ष्मण दम तोड़ देता है। उधर उर्मिला एक स्वस्थ्य बच्चे को जल्म देती है। उप्पी रोता हुआ अपने किए पर पछता रहा है। कुछ महीनों बाद वनदेवी के मंदिर में पुजा के लिए पूरा गांव और वनविभाग इक्टठा होता है। इस बार देवी के साथ ही शहीदों की भी पूजा होती है। पूजा के बाद पुजारी उर्मिला के बच्चे को गोद ले, उसे भागीरथ कह कर पुकारता है।

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