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रोजगार में लैंगिक आधार पर होने वाले भेदभाव समाप्त हो : नायडू

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आज कहा कि जबकि भारत में विश्व में सबसे अधिक संख्या में महिलाएं विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित (एसटीईएम) विषयों में स्नातक (लगभग 40 प्रतिशत) में उत्तीर्ण हो रही हैं। किन्तु देश में एसटीईएमसे जुड़े क्षेत्रों से संबंधित रोजगार में उनकी अत्यधिक कम भागीदारी यानी 14 प्रतिशत है, जिसमें सुधार लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट अध्ययनों में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है, जिसे तेजी से सुधारने की जरूरत है।

इस संबंध में, नायडू ने कहा कि आईआईटी में छात्राओं की संख्या में सुधार के लिए सरकार के प्रयासों का परिणाम सामने आया है।इसमें 2016 में महिलाओं की संख्या सिर्फ 8 प्रतिशत थी, जो अब बढक़र लगभग 20 प्रतिशत हो गई है।

उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के ‘महिला वैज्ञानिक कार्यक्रम’की भी सराहना की, क्योंकि यह एक ऐसी प्रशंसनीय पहल है, जो महिलाओं को विज्ञान और गणित में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी महिला वैज्ञानिकों का स्वागत करना चाहिए और बालिकाओं के लिए विज्ञान के क्षेत्र में प्रेरणास्रोत तैयार करना चाहिए।

चेन्नई के गणितीय विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में उपराष्ट्रपति ने एसटीईएम के रुझानों के बारे में बात की और कहा कि हम किस प्रकार रोजगार सृजन में डेटा विज्ञान क्रांति की क्षमता का दोहन कर सकते हैं। नायडू ने कहा कि डेटा ने व्यापार करने के तरीके को बदल दिया है और हमें अपने युवा स्नातकों को इन नए कौशल-सेटों से लैस करने के लिए अपने पारंपरिक इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम से परे देखना होगा। उन्होंने कहा कि इस तरहहमें उद्योग की वर्तमान मांगों के लिए प्रासंगिक रहना चाहिए।

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