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हॉकी इंडिया ने कोरोना में भी अंपायरों को सक्रिय रखा: जावेद शेख

मुंबई । इंडिया के अनुभवी हॉकी अंपायर जावेद शेख ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर स्थगित हुई खेल प्रतियोगिताओं के बीच तकनीकी अधिकारियों और अंपायरों के लिये नियमित तौर पर ऑनलाइन पाठ्यक्रमों का संचालन जारी रखने पर हॉकी इंडिया की सराहना की है।

जावेद ने कहा कि हॉकी इंडिया ने उनमें से अधिकतर लोगों को एशियाई हॉकी महासंघ के हाल के ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मैचों के प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करना था। इन सभी पाठ्यक्रमों को नि:शुल्क संचालित किया गया है।

अनुभवी हॉकी अंपायर जावेद शेख के मुताबिक कार्यशालाओं, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों, वीडियो आदि के अलावा अंपायरों को अपडेट रखने का यह निरंतर प्रयास उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद करता है।

कॉमनवेल्थ, एशियन खेल और 2014 में हेग में पुरुष विश्व कप और 2018 में भुवनेश्वर में हुए विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग कर चुके जावेद ने कहा, जब मैंने वर्ष 1999-2000 में अंपायरिंग शुरू की तब चीजें बहुत अलग थीं।

हमें उस वक्त सीनियर अंपायरों से मार्गदर्शन लेना होता था और इस तरह का कभी कोई पाठ्यक्रम या सेमिनार आयोजित नहीं होता था। सीखने के लिए प्रोत्साहन और ज्ञान के आधार की कमी से कई बार लोग हॉकी में आगे नहीं आ सकें।

हॉकी इंडिया ने व्हाट्सएप समूह का गठन किया है जिसमें प्रत्येक समूह में एक अनुभवी अंतर्राष्ट्रीय अंपायर के साथ 15 अधिकारी शामिल हैं जो विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

टोक्यो ओलंपिक के लिये अंपायर नियुक्त किये गये जावेद ने बताया कि ये व्हाट्सएप समूह लगातार सक्रिय हैं जहां हम मैचों में विभिन्न स्थितियों पर स्पष्टता प्रदान करने के लिए वीडियो के साथ तैयार सामग्री साझा करते हैं।

महाराष्ट्र से हमारे पास लगभग 70 युवा अधिकारी थे जो समूह में इन चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे।

जावेद ने बताया कि जहां 90 के दशक में प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में मैचों के संचालन के लिए भारत में मुश्किल से 3-4 अंतर्राष्ट्रीय अंपायर उपलब्ध थे वहीं आज हॉकी इंडिया के अथक प्रयासों से 14-15 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय अंपायर उपल्बध कराया जा रहे हैं जिन्हें अक्सर अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में आमंत्रित किया जाता है।

उन्होंने कहा, एक दशक पूर्व अंपायरिंग करना हमेशा कई लोगों के लिए ‘दूसरे विकल्प’ के रूप में था। उस वक्त लगभग 35-38 वर्ष के आसपास के पूर्व खिलाड़ी थे जो अक्सर खेल में प्रासंगिक बने रहने के लिए अंपायरिंग करते थे।

लेकिन इन दिनों फेडरेशन ने जिस तरह के प्रोत्साहन और अवसर प्रदान किए हैं उससे हमारे पास कई 25 वर्ष के युवा अंपायरिंग करने का प्रयास कर रहे। मुझे इस पर वास्तव में गर्व महसूस होता है।

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