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शराब भी खाने-पीने का हिस्सा है, इसकी बिक्री शुरू हो

नई दिल्ली। खाद्य पदार्थों से जुड़ा देश का एक कानून शराब को खाने का हिस्सा मानता है। इसी को ढाल बनाकर शराब बनाने वाली कंपनियां चाहती हैं कि लॉकडाउन की अवधि में भी इसकी बिक्री हो। भले ही बिक्री का समय तय कर दिया जाए। इन कंपनियों का कहना है कि जब बाजार में वैध तरीके से शराब की बिक्री नहीं होगी तो लोग इसे पाने के लिए अवैध तरीका अपनाएंगे। यह न सिर्फ समाज विरोधी कार्य होगा बल्कि इससे सरकारी खजाने को भी नुकसान होगा।
देश में शराब बनाने वाली बड़ी कंपनियों की अगुवाई करने वाले इंडियन स्पिरिट ऐंड वाइन असोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसडब्ल्यूएआई) ने केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के साथ केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले डिपार्टमेंट ऑफ प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री ऐंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) और नीति आयोग को भी इस बारे में पत्र लिखा है। अपने पत्र में संगठन ने कहा है कि शराब की बिक्री रोकने से सिर्फ इसके अवैध कारोबार को ही बढ़ावा मिल रहा है। इसलिए इसकी बिक्री खोली जाए, भले की रोज कुछ देर के लिए।
आईएसडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष अमृत किरन सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून 2006 में शराब को खाने का हिस्सा माना गया है और खाना तो आवश्यक वस्तु है। जब आवश्यक वस्तु आसानी से नहीं मिलेगी तो लोग इसके लिए दूसरा तरीका अपनाएंगे। इससे पुलिस बल पर भी काम का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
पश्चिम बंगाल में शराब की अहमियत को समझते हुए इसकी दुकानों पर तो बिक्री रोक दी है, लेकिन होम डिलिवरी की अनुमति है। पश्चिम बंगाल सरकार की एक अधिसूचना कहती है कि जब तक लॉकडाउन चल रहा है, तब तक शराब सिर्फ होम डिलिवरी के जरिये ही मिलेगी। जिनके पास लिकर लाइसेंस है, वे दिन में 11 बजे से 2 बजे तक ग्राहकों से ऑर्डर ले सकेंगे और 2 बजे से शाम के पांच बजे तक शराब उनके घर पहुंचा सकेंगे। इसके लिए लिकर शॉप के डिलिवरी स्टाफ के लिए पास मिलेगा। हर स्टोर को इस तरह के तीन पास ही दिए जाएंगे।
संगठन का कहना है कि लगभग सभी राज्यों के राजस्व में शराब से वसूले जाने वाले टैक्स की हिस्सदारी 15 से 30 फीसदी की है। इस समय अर्थव्यवस्था में एक तरह से ठहराव आ गया है, इसलिए शराब से होने वाली आमदनी उनके लिए महत्वपूर्ण है। वैसे भी इस समय कोरोना महामारी से लडऩे के लिए राज्यों को ज्यादा पैसे चाहिए।
इस क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जबसे लॉकडाउन हुआ है, तब से देशभर में शराब की बिक्री बंद है। इसलिए शराब बनाने वाले कंपनियों ने भी इसका उत्पादन बंद कर दिया है। अब तो उनके कारखाने में कुछ बन रहा है तो वह है सैनिटाइजर, क्योंकि इसमें भी 70 फीसदी ऐल्कॉहॉल ही होता है।
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