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एनपीआर से किसी को डरने की जरूरत नहीं: शाह

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में स्पष्ट कर दिया है कि देश में एनपीआर बाबत कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इस प्रक्रिया में पहले भी दस्तावेज नहीं मांगे गए थे और अब भी नहीं मांगेंगे। इसे लेकर बेवजह भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं।
राज्यसभा में दिल्ली हिंसा पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने एनपीआर पर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करते हुए कहा कि किसी के पास जो भी सूचना होगी वो ही देने में स्वतंत्र है और जो नहीं होगी वह नहीं मांगी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति ऐसी जानकारी देने से मना करता है तो उसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं होगी। कुछ लोगों ने अफवाह फैलाई है कि जो व्यक्ति सूचना नहीं देंगे, उनके कॉलम में श्डीश् लिख दिया जाएगा। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि किसी भी केस में डी नहीं लिखा जाएगा। केंद्रीय गृहमंत्री ने एनपीआर पर बोलते हुए कहा कि अगर अब भी किसी को मेरी बात पर यकीन नहीं है, तो विपक्ष के नेता मेरे साथ बैठक कर सकते हैं। कांग्रेस पार्टी के गुलाम नबी आजाद, जो कि नेता प्रतिपक्ष भी हैं, वे दूसरे वरिष्ठ नेता जैसे आनंद शर्मा एवं दूसरे नेताओं को साथ लेकर मेरे पास आ जाएं। हम विस्तार से इस पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि केवल मैं ही वहां पर नहीं रहूंगा। एनपीआर पर काम कर रहे वरिष्ठ अधिकारियों को भी उस चर्चा में बुलाया जाएगा। हर बात पर बहुत ही खुलकर चर्चा होगी। देश में किसी को भी एनपीआर से डरने की आवश्यकता नहीं है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले दिनों जारी नोटिफिकेशन में साफ कर दिया था कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के हाउस होल्ड सर्वे में 31 तरह की सूचनाएं देनी होंगी। इससे पहले 2010 में जब एनपीआर तैयार हुआ था, तो 16 सूचनाएं मांगी गई थी। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार के एनपीआर में बायोमेट्रिक जानकारी नहीं ली जाएगी। साथ ही लोगों से जुटाई गई जानकारी के आधार पर कोई पहचान पत्र भी जारी नहीं होगा। पिछले कुछ समय से एनपीआर को लेकर कई तरह की भ्रामक सूचनाएं सामने आ रही थीं। जैसे, लोगों से बायोमेट्रिक जानकारी ली जाएगी। एनपीआर 2010 में व्यक्ति का नाम, मुखिया से संबंध, पिता का नाम, माता का नाम, पतिध्पत्नी का नाम (यदि विवाहित), लिंग, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, जन्म का स्थान, घोषित राष्ट्रीयता, सामान्य निवासी का वर्तमान पता, वर्तमान पते पर रहने की अवधि, स्थायी निवास पता, व्यवसायध्क्रियाकलाप और शैक्षिक योग्यता शामिल थी। इसके अलावा यूआईडीएआई के माध्यम से दोहराव को रोकने और आधार नंबर बनाने के उद्देश्य हेतु 05 वर्ष और उससे ऊपर के व्यक्तियों के लिए ओआरजीआई को आवंटित राज्यों में तीन बायोमेट्रिक वस्तुतरू फोटो, 10 अंगुलियों की छाप और 02 आयरिस भी एकत्रित किए गए थे।

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