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Sports News। भारतीय हॉकी के दिग्गज अजीत पाल सिंह ने पुरानी यादों को किया ताजा

भारतीय हॉकी के दिग्गज अजीत पाल सिंह ने पुरानी यादों को किया ताजा

भारतीय हॉकी के दिग्गज अजीत पाल सिंह ने पुरानी यादों को किया ताजा

Sports News । टोक्यो ओलंपिक खेलों के आयोजन में एक महीने से भी कम समय रहने के मद्देनजर जहां भारतीय हॉकी एथलीट बेहतर प्रदर्शन के लिए अभ्यास में जुटे हैं तो वहीं इस बीच पूर्व हॉकी खिलाड़ी अपनी पुरानी यादों को ताजा कर रहे हैं। भारतीय हॉकी के दिग्गज एवं पूर्व भारतीय कप्तान अजीत पाल सिंह ने अपने ओलंपिक पदार्पण और 1968 के मैक्सिको और 1972 के म्यूनिख ओलंपिक खेलों में भारत की लगातार कांस्य पदक जीत की यादों को ताजा किया है।

अजीत पाल ने हॉकी इंडिया की फ्लैशबैक सीरीज के चौथे भाग को याद करते हुए कहा,  मुझे 1968 के ओलंपिक खेलों के कोचिंग शिविर के लिए चुना गया था, तब मैं कॉलेज में था और अपने होम टाउन पंजाब का प्रतिनिधित्व कर रहा था। मैं शिविर में सबसे कम उम्र का खिलाड़ी था और मुझे लगता है कि मैं बहुत भाग्यशाली था कि आखिरकार मुझे 1968 के ओलंपिक खेलों में खेलने का मौका मिला।

पूर्व कप्तान ने कहा,  न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरुआती मैच हारने के बाद टीम में कुछ फेरबदल हुआ और मुझे सेंटर-हाफ के रूप में लाया गया। मेरा पहला ओलंपिक मैच पश्चिम जर्मनी के खिलाफ था, जो उस समय की सबसे मजबूत टीमों में से एक थी। मैच से एक रात पहले मेरे पेट में खलबली मच रही थी, उस वक्त मुझ पर क्या दबाव था उसक अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। हम पहले ही मैच हार चुके थे और हमें एक मजबूत टीम के खिलाफ खड़ा होना था।

उल्लेखनीय है कि तीन बार के विश्व कप पदक विजेता (1971 में कांस्य, 1973 में रजत, 1975 में स्वर्ण) और भारत के एकमात्र विश्व कप विजेता कप्तान अजीत पाल भी कांस्य पदक जीतने वाली हरमेक सिंह की अगुवाई वाली टीम का हिस्सा थे।

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